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मध्य प्रदेश में गुलियन बेरी सिंड्रोम का प्रकोप, बच्चों के लिए अधिक घातक, जानें क्या है ये बीमारी, लक्षण और कारण

मध्य प्रदेश के कई जिलों में गुलियन बेरी सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome - GBS) के मामले बढ़ रहे हैं। ये मामले मुख्यता छोटे बच्चों को प्रभावित कर रहे हैं, जो कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बन गया है। गुलियन बेरी सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जहां शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपनी ही तंत्रिकाओं पर हमला कर देती है। इसे एक 'ऑटोइम्यून डिसऑर्डर' माना जाता है। मध्य प्रदेश में मौसम के बदलाव और वायरल संक्रमणों के बढ़ते प्रभाव के चलते GBS के नए मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। शुरुआत में ये सामान्य कमजोरी की तरह महसूस होता है, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए, तो यह पूरे शरीर में लकवा का कारण बन सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में यह बीमारी अधिक गंभीर हो रही है, क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता। ITM हॉस्पिटल ग्वालियर के न्यूरोलॉजी विभाग ने यह देखा है कि समय पर निदान और सही 'इम्युनोग्लोबुलिन थेरेपी' से इस बीमारी का पूरी तरह इलाज संभव है।

गुलियन बेरी सिंड्रोम (GBS) के मुख्य लक्षण और शुरुआती संकेत
GBS के लक्षणों को पहचानना एक बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि ये आमतौर पर दूसरी सामान्य बीमारियों की तरह लगते हैं। अक्सर, पैरों से कमजोरी शुरू होती है और ये धीरे-धीरे शरीर के ऊपरी हिस्से तक पहुँच जाती है। सबसे पहले, मरीज को उंगलियों, टखनों या कलाई में झुनझुनी और सुन्नपन का अनुभव होता है। उसके बाद, पैरों में कमजोरी आती है, जिससे चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने में दिक्कत होती है। कुछ ही दिनों में ये कमजोरी हाथों और चेहरे की मांसपेशियों तक फैल सकती है। गंभीर मामलों में, बोलने, निगलने या आँखों को हिलाने में भी परेशानी हो सकती है। अगर आपको या आपके बच्चे को अचानक शरीर के निचले हिस्से में कमजोरी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज मत करें।

GBS होने के प्रमुख कारण और ट्रिगर फैक्टर्स क्या हैं?
हालांकि GBS के कारण अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में ये देखा गया है कि यह किसी संक्रामक बीमारी के कुछ हफ्तों बाद विकसित होता है। मध्य प्रदेश में बढ़ते मामलों के लिए श्वसन संक्रमण या Campylobacter Jejuni बैक्टीरिया से होने वाले पेट के संक्रमण को मुख्य कारण माना जा रहा है। कभी-कभी फ्लू, जीका वायरस, या अन्य वायरल बीमारियों के बाद शरीर का इम्यून सिस्टम गड़बड़ा जाता है और यह वायरस को नष्ट करने के बजाय स्वस्थ नसों की सुरक्षात्मक परत, जिसे मायेलिन शीथ कहा जाता है, को नुकसान पहुंचाने लगता है। इससे नसों से मस्तिष्क तक संकेतों का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे पक्षाघात की स्थिति उत्पन्न होती है।

GBS का निदान और ITM हॉस्पिटल ग्वालियर में उपलब्ध आधुनिक सुविधाएं
GBS का पता इसके लक्षणों और कुछ खास मेडिकल टेस्ट के आधार पर लगाया जाता है। ITM हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, ग्वालियर में हमारे पास एक अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक लैब है, जहां 'लंबर पंचर' (रीढ़ की हड्डी के तरल पदार्थ की जांच) और 'इलेक्ट्रोमायोग्राफी' (EMG) जैसे टेस्ट की सुविधाएं मौजूद हैं। ये टेस्ट नसों की क्षति की गहराई को समझने में मदद करते हैं। उपचार के लिए आमतौर पर दो मुख्य तरीके अपनाए जाते हैं: प्लाज्माफेरेसिस (Plasmapheresis) और इंट्रावेनस इम्युनोग्लोबुलिन (IVIG)। प्लाज्माफेरेसिस में रक्त से उन हानिकारक एंटीबॉडीज़ को निकाला जाता है जो नसों पर हमला कर रही हैं। वहीं, IVIG थेरेपी में शरीर में स्वस्थ एंटीबॉडीज़ डाली जाती हैं। 

बचाव के उपाय और माता-पिता के लिए विशेष सलाह
GBS को पूरी तरह से रोकना मुश्किल है, क्योंकि ये एक ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया है। लेकिन, संक्रमण से बचकर इसके जोखिम को कम किया जा सकता है। साफ-सफाई पर ध्यान दें, खासकर खाना खाने से पहले हाथ धोना और साफ पानी पीना ज़रूरी है। अगर आपके बच्चे को कोई वायरल बुखार या दस्त होता है, तो अगले दो से चार हफ्तों तक उसकी शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। अगर किसी भी तरह की असामान्य कमजोरी दिखाई दे, तो जल्दी से डॉक्टर से संपर्क करें।

 

FAQ: गुलियन बेरी सिंड्रोम के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या गुलियन बेरी सिंड्रोम एक संक्रामक बीमारी है?
नहीं, GBS एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। यह शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी के कारण होता है।

2. क्या GBS से पूरी तरह ठीक होना संभव है?
हाँ, अधिकांश लोग सही समय पर इलाज मिलने पर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, हालांकि रिकवरी में कुछ महीनों से लेकर एक साल तक का समय लग सकता है।

3. क्या ग्वालियर में GBS के इलाज के लिए अच्छे अस्पताल हैं?
ग्वालियर में ITM हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर GBS और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के इलाज के लिए एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ आधुनिक वेंटिलेटर और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं।

4. GBS के इलाज में कितना समय लगता है?
अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करती है। आमतौर पर 2 से 4 सप्ताह का गहन उपचार और उसके बाद फिजियोथेरेपी की आवश्यकता होती है।

5. क्या टीकाकरण से GBS हो सकता है?
यह अत्यंत दुर्लभ है। टीकाकरण की तुलना में संक्रमण (जैसे फ्लू) से GBS होने का खतरा कई गुना अधिक होता है।

 

निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में गुलियन बेरी सिंड्रोम का प्रकोप हमें स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की एक महत्वपूर्ण चेतावनी दे रहा है। खासकर बच्चों में लक्षणों की जल्दी पहचान करना सबसे बड़ा बचाव है। ग्वालियर और आस-पास के इलाकों के लोगों के लिए ITM हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर एक भरोसेमंद नाम है, जहां हम बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं और मानवता की देखभाल करते हैं। चिंता की कोई बात नहीं है, सही जानकारी और त्वरित उपचार से इस बीमारी को पूरी तरह से हराया जा सकता है।

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